परछाइयाँ
- -Creator

- Jun 20, 2023
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क्यों चलती हैं हमारे पीछे,
मैं ढूंढती हूँ उन्हें देखकर नीचे।
दिखती ही नहीं, साया है ये,
व्यक्तित्व की छाया है ये।
पास हो तोह तुच्छ, दूर तोह विशाल,
बहती है नारी की तरह।
पार करती नहीं यह सीमा,
रहती सदैव पीछे- पीछ।
शुक्रगुज़ार हूँ मैं इनकी
यही मेरा सहारा।
रहूंगी हमेशा इनके आगे
ज़िन्दगी में यू ही आवारा।





Beautiful.👌